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Jul 3, 2024

Ranıyan Sab Jaanti Hain - Podcast: Vartika Nanda: Year 2015- 2024

 Ranıyan Sab Jaanti Hain - Podcast:  Vartika Nanda:  Year 2015- 2024

Review Of Dr Vartika Nanda Book Raniyan Sab Janti Hain - Amar Ujala Kavya - स्त्री मन के अथाह सागर का मंथन करती है वर्तिका नंदा कविता संग्रह  'रानियाँ सब जानती हैं' की कविताएं

Mar 8, 2024 Raniyan Sab Janti Hain।Podcas।t Poetry। Literature ।Year 2015 ।Vartika Nanda।

रानियों के पास सारे सच थे पर जुबां बंद। पलकें भीगीं। सांसें भारी। मन बेदम। रानियों की कहानी किसी दिन एक किस्सागो ने सुनी तो सोचा –उनकी बात जितनी कह सकूं, कह लूं।

मैं वही किस्सागो हूं। दर्द के उन किस्सों को मैंने कविता में कहने की कोशिश की है।

https://youtu.be/kMur76e5KPE?si=9ntij9xMuhu8VQLK



Promo-1

रानियां सब जानती हैं,गहरी वास्तविकता से हो कर गुज़री अनंत शब्दों की पीड़ा..

चीख़ें, कराहें, बेबसी क्रूरता,भद्दी गालियां,रिसते घाव ,अपराध की दुनियां.... 

कांपता सच, सुलगती चुप्पी, काग़ज़ों के पुलिंदे,भावनाओं की रद्दी,सत्ताओं के खेल, राजाओं की चौसर..

सब के सब उतरे कागज़ पर

रानियां सब जानती हैं 

डॉ. वर्तिका नंदा लिखित काव्य संग्रह का धारावाहिक वाचन..

वर्तिका नंदा यू ट्यूब चैनल पर.

YOUTUBE DESCRIPTION:Title- Raniyan Sab Jaanti Hain

Author- Vartika Nanda

Podcast & audio editing: Sukhnandan Bindra

वो रानी थी। पर कुछ ही दिनों में राजा को महल में एक नई रानी की दरकार हुई। रानी खुद ही महल से बाहर चली जाती तो आसानी होती पर ऐसा हुआ नहीं। तब राजा ने शतरंज की बिसात बिछाई। सिपहसालार जमा किए। राजा महल में लाना चाहता था - नई रानी। इसलिए जो रानी मौजूद थी, उस पर लगाए जाने लगे आरोप - महल पर कब्जे, बदमिजाजी और संस्कार विहीन होने के ! रानी तब भी बहुत दिनों तक डटी रही। कोई जान न पाया राजा महल में किन सुरंगों को खुदवा रहा था। रानी चुप रही। बड़ी दीवारों ने सोख लीं सिसकियां। दीवारों को आदत थी। उधर पिछले दरवाजे से नई रानी आ भी गई।

बाहर की दुनिया जान न पाई नई रानी के लिए पुरानी रानी को दीवार में चिनवाना कब हुआ और कैसे हुआ।

दीवार में चिनवा दी गई उसी रानी की है यह कहानी। जमाने गुजर जाएंगें पर रानी की इस चीख को आप भूल न पाएंगें क्योंकि सच को जानती हैं - रानियां। सिर्फ रानियां।

Vartika Nanda's book Raniyan Sab Janti Hain is a collection of poems on victims and survivors of various crimes. This book deals with the culture of silence and sets mood for gender discourse. It was listed amongst the TOP 5 books in the year 2015 by Femina.

This book was published by Vani Prakashan.

Editing and Voice over of this podcast series: Sukhnandan Bindra @sukhnandan_bindra

#raniyansabjantihain #vartikananda #vartikanandapoetry #tinkatinkafoundation #tinkajailradio

2015: This book was released during the International Book Fair at Lal Chowk Theatre, Pragati Maidan on 21st February, 2015. The panelists of the programme included Tejender Luthra (IPS), Laxmi Shankar Vajpayee, Shobha Vijender, Anuradha Prasad, Rashmi Singh (IAS) and Richa Anirudh.

2015: Raniyan Sab Janti Hain also produced a thematic representation of violence against women 'Sshhh...... A unique initiative which aimed to challenge the perception that domestic violence is limited to the lower strata of society and raise the question of whether the society and the system truly support women in breaking the silence, through a dramatic dialogue of dance, music and theatre with soaring live vocals and percussion. This was done with Arunima Kumar, a noted Kuchipudi dancer from UK. (This programme was organized for a special audience at CSOI, Chanakya Puri, New Delhi.)


released on 27 June 2024, Thursday. On Youtube:  https://youtube.com/shorts/N96pkUy-eEE?si=a1UTtOyBiSH-KP9K

Promo-2

रानियाँ सब जानती हैं,रानियों के पास सारे सच थे पर जुबां बंद। पलकें भीगीं। मन बेदम। राजा भूल जाते हैं, जब भी कोई विनाश आता है तो उसकी तह में होती है किसी रानी की आह। रानियाँ सब जानती हैं, वे जानती हैं, पत्थर की दीवारों में कोई रोशन दान नहीं और पायल की आवाज में इतना ज़ोर नहीं। चीखें यहीं दबेंगी, आंसू यहीं झपकेंगे, मकबरे यहीं बनेंगे, तारीखें यहीं बदलेंगी पर उनकी किस्मत नहीं। रानियाँ सब जानती हैं, पर चुप रहती है, बाहर वाले शायद ये नहीं जानते कि किले के अंदर बैठी रानी एलान कर चुकी है, थी.हू..रहूँगी। रानियाँ सब जानती हैं, काव्य संग्रह का धारावाहिक वाचन। वर्तिका नन्दा यूट्यूब चैनल पर।



YOUTUBE DESCRIPTION:Title- Raniyan Sab Jaanti Hain

Author- Vartika Nanda, Author Production & audio editing: Sukhnandan Bindra, Broadcaster

वो रानी थी। पर कुछ ही दिनों में राजा को महल में एक नई रानी की दरकार हुई। रानी खुद ही महल से बाहर चली जाती तो आसानी होती पर ऐसा हुआ नहीं। तब राजा ने शतरंज की बिसात बिछाई। सिपहसालार जमा किए। राजा महल में लाना चाहता था नई रानी। इसलिए जो रानी मौजूद थी, उस पर लगाए जाने लगे आरोप - महल पर कब्जे, बदमिजाजी और संस्कार विहीन होने के ! रानी तब भी बहुत दिनों तक डटी रही। कोई जान न पाया राजा महल में किन सुरंगों को खुदवा रहा था। रानी चुप रही। बड़ी दीवारों ने सोख लीं सिसकियां। दीवारों को आदत थी। उधर पिछले दरवाजे से नई रानी आ भी गई।

बाहर की दुनिया जान न पाई नई रानी के लिए पुरानी रानी को दीवार में चिनवाना कब हुआ और कैसे हुआ।

दीवार में चिनवा दी गई उसी रानी की है यह कहानी। जमाने गुजर जाएंगें पर रानी की इस चीख को आप भूल न पाएंगें क्योंकि सच को जानती हैं - रानियां। सिर्फ रानियां।

Vartika Nanda's book Raniyan Sab Janti Hain is a collection of poems on victims and survivors of various crimes. This book deals with the culture of silence and sets mood for gender discourse. It was listed amongst the TOP 5 books in the year 2015 by Femina. 

This book was published by Vani Prakashan.

#raniyansabjantihain #vartikananda #vartikanandapoetry #tinkatinkafoundation #tinkajailradio

2015: This book was released during the International Book Fair at Lal Chowk Theatre, Pragati Maidan on 21st February, 2015. The panelists of the programme included Tejender Luthra (IPS), Laxmi Shankar Vajpayee, Shobha Vijender, Anuradha Prasad, Rashmi Singh (IAS) and Richa Anirudh.

2015: Raniyan Sab Janti Hain also resulted in the production of a thematic representation of violence against women 'Sshhh...... A unique initiative which aims to challenge the perception that domestic violence is limited to the lower strata of society and raise the question whether the society and the system truly support women in breaking the silence, through a dramatic dialogue of dance, music and theatre with soaring live vocals and percussion. This was done in coordination with Arunima Kumar, a noted Kuchipudi dancer from UK. (This program was organized for a special audience at CSOI, Chanakya Puri, New Delhi.)


released on 30 June 2024 on YouTubehttps://youtube.com/shorts/CsYBAiYzooQ?si=B7I2BtghSxMyn3Es


Preface 

ानियाँ सब जानती हैं

याचक बनाते महिला आयोग उखडी सांसों की पुलिस की महिला अपराध शाखाओं ढुलमुल कचेरियो और बार-बार अपराध कर कूल चबूतरे से थपकिया पाते अपराध, सब जानकर भी चुप रह रही रानियाँ…

रानियाँ सब जानती हैं, पर चुप रहती है…

रानियाँ सब जानती हैं, पर मुस्कुराती है…

रानियों के पास सेना नहीं, सत्ता नहीं, राजपत भी नहीं लेकिन उनके पास सच है…

रानियाँ जो जानती है वो राजा नहीं जानते। राजा नहीं जानते दर्द के हिचकोले लेती यह आहे सियासतों, को तख्तों को मिट्टी में मिला देती है एक दिन…

रानियाँ सब जानती हैं…रानियाँ सब जानती हैं


YOUTUBE DESCRIPTION:Title- Raniyan Sab Jaanti Hain

Author- Vartika Nanda, Author Production & audio editing: Sukhnandan Bindra, Broadcaster

वो रानी थी। पर कुछ ही दिनों में राजा को महल में एक नई रानी की दरकार हुई। रानी खुद ही महल से बाहर चली जाती तो आसानी होती पर ऐसा हुआ नहीं। तब राजा ने शतरंज की बिसात बिछाई। सिपहसालार जमा किए। राजा महल में लाना चाहता था नई रानी। इसलिए जो रानी मौजूद थी, उस पर लगाए जाने लगे आरोप - महल पर कब्जे, बदमिजाजी और संस्कार विहीन होने के ! रानी तब भी बहुत दिनों तक डटी रही। कोई जान न पाया राजा महल में किन सुरंगों को खुदवा रहा था। रानी चुप रही। बड़ी दीवारों ने सोख लीं सिसकियां। दीवारों को आदत थी। उधर पिछले दरवाजे से नई रानी आ भी गई।

बाहर की दुनिया जान न पाई नई रानी के लिए पुरानी रानी को दीवार में चिनवाना कब हुआ और कैसे हुआ।

दीवार में चिनवा दी गई उसी रानी की है यह कहानी। जमाने गुजर जाएंगें पर रानी की इस चीख को आप भूल न पाएंगें क्योंकि सच को जानती हैं - रानियां। सिर्फ रानियां।

Vartika Nanda's book Raniyan Sab Janti Hain is a collection of poems on victims and survivors of various crimes. This book deals with the culture of silence and sets mood for gender discourse. It was listed amongst the TOP 5 books in the year 2015 by Femina. 

This book was published by Vani Prakashan.

#raniyansabjantihain #vartikananda #vartikanandapoetry #tinkatinkafoundation #tinkajailradio

2015: This book was released during the International Book Fair at Lal Chowk Theatre, Pragati Maidan on 21st February 2015. The panelists of the programme included Tejender Luthra (IPS), Laxmi Shankar Vajpayee, Shobha Vijender, Anuradha Prasad, Rashmi Singh (IAS) and Richa Anirudh.

2015: Raniyan Sab Janti Hain also produced a thematic representation of violence against women 'Sshhh...... A unique initiative which aimed to challenge the perception that domestic violence is limited to the lower strata of the society and raise the question whether the society and the system truly support women in breaking the silence, through a dramatic dialogue of dance, music and theatre with soaring live vocals and percussion. This was done with Arunima Kumar, a noted Kuchipudi dancer from UK. (This programme was organized for a special audience at CSOI, Chanakya Puri, New Delhi.)


Released on 5july 2024 on youtube: https://youtube.com/shorts/U5HsKBTEq7g?si=HUG__BNBNds1jePH

महिला आयोग,

पुलिस की महिला अपराध शाखाओं,

पिलपिली कचहरियों,

सुस्ताते कानून

और

बार-बार अपराध कर

गोल चबूतरे से ताकत पाते

तमाम अपराधियों के लिए

जिन्हें जान कर भी चुप रहीं

रानियां  

LINK:https://x.com/vartikananda/status/1809228739554976194

15 august 2024
लड़कियां अपना पता खुद बनाती हैं

लड़कियां अपना पता खुद होती हैं

लड़कियों से ही बनते हैं देश के नक्शे

लड़कियों से ही लिखी जाती हैं इबारतें

जहां लड़कियां मुस्कुराती हैं

वहीं से शुरू होती है

आजादी क्योंकि आजादी की आंखें होती हैं लड़कियां

~वर्तिका नन्दा (रानियां सब जानती हैं)

Sep 18, 2024



YOUTUBE DISCRIPTION :
#crimeagainstwomen #vartikananda #raniyansabjantihain
#vartikananda  #raniyansabjantihain #crimeagainstwomen
Title: Raniyan Sab Jaanti Hain
Author: Vartika Nanda
Production & audio editing: Sukhnandan Bindra, Broadcaster
Series: Taken from page number 7 of #raniyansabjaantihain

वो रानी थी। पर कुछ ही दिनों में राजा को महल में एक नई रानी की दरकार हुई। रानी खुद ही महल से बाहर चली जाती तो आसानी होती पर ऐसा हुआ नहीं। तब राजा ने शतरंज की बिसात बिछाई। सिपहसालार जमा किए। राजा महल में लाना चाहता था – नई रानी। इसलिए जो रानी मौजूद थी, उस पर लगाए जाने लगे आरोप – महल पर कब्जे, बदमिजाजी और संस्कार विहीन होने के! रानी तब भी बहुत दिनों तक डटी रही। कोई जान न पाया राजा महल में किन सुरंगों को खुदवा रहा था। रानी चुप रही। बड़ी दीवारों ने सोख लीं सिसकियां। दीवारों को आदत थी। उधर पिछले दरवाजे से नई रानी आ भी गई।

बाहर की दुनिया जान न पाई – नई रानी के लिए पुरानी रानी को दीवार में चिनवाना

Vartika Nanda’s book-Raniyan Sab Janti Hain- is a collection of poems on victims and survivors of various crimes. This book deals with the culture of silence and sets mood for gender discourse. It was listed amongst the TOP 5 books in the year 2015 by Femina.

Website:www.vartikananda.com
https://en.wikipedia.org/wiki/Vartika...
Dr. Vartika Nanda is a prison reformer using the best practices of journalism and academia for prison reforms. She is the founder of Tinka Tinka Foundation, which works for improving prison life, including the introduction of prison radio in District Jail, Agra and the jails of Haryana. She has authored three books on prisons. Her Tinka Tinka Jail Radio Podcasts are exclusive podcasts dedicated to Indian prisons. President of India conferred the Stree Shakti Puraskar on her in 2014 for her contribution to women empowerment through media and literature. Her name has also been included in the Limca Book of Records twice for her unique work on prison reforms. Her work on prisons was taken cognizance by the Supreme Court of India in 2018. Currently, she heads the Department of Journalism, Lady Shri Ram College, Delhi University.

Oct 26, 2024


youtube discription:

Title: Raniyan Sab Jaanti Hain
Author: Vartika Nanda
Production & audio editing: Sukhnandan Bindra, Broadcaster
Series: Taken from page number 9 and 10 of #raniyansabjaantihain

अपमान – अपराध – प्रार्थना - चुप्पी...
रानियों के पास सारे सच थे पर जुबां बंद। पलकें भीगीं। सांसें भारी। मन बेदम। रानियों की कहानी किसी दिन एक किस्सागो ने सुनी तो सोचा –उनकी बात जितनी कह सकूं, कह लूं।
मैं वही किस्सागो हूं। दर्द के उन किस्सों को मैंने कविता में कहने की कोशिश की है। 

Vartika Nanda’s book-Raniyan Sab Janti Hain- is a collection of poems on victims and survivors of various crimes. This book deals with the culture of silence and sets mood for gender discourse. It was listed amongst the TOP 5 books in the year 2015 by Femina.

Dr. Vartika Nanda is a prison reformer using the best practices of journalism and academia for prison reforms. She is the founder of Tinka Tinka Foundation, which works for improving prison life, including the introduction of prison radio in District Jail, Agra and the jails of Haryana. She has authored three books on prisons. Her Tinka Tinka Jail Radio Podcasts are exclusive podcasts dedicated to Indian prisons. President of India conferred the Stree Shakti Puraskar on her in 2014 for her contribution to women empowerment through media and literature. Her name has also been included in the Limca Book of Records twice for her unique work on prison reforms. Her work on prisons was taken cognizance by the Supreme Court of India in 2018. Currently, she heads the Department of Journalism, Lady Shri Ram College, Delhi University.


May 18, 2020

Ranıyan Sab Jaanti Hain - The Book: Vartika Nanda: Year 2015











रानियां सब जानती हैं- डॉ. वर्तिका नन्दा


अपमान-अपराध-प्रार्थना-चुप्पी... से उपजर्जी वर्तिका नन्दा की ये कविताएं उन रानियों ने कही हैं, जिनके पास सारे सच, पर जुबां बंद। पलकें भीगीं। सांसें भारी। मन बेदम।


इन कविताओं को समाज में बिछे लाल कालीनों के नीचे से निकाल कर लिखा गया है- सुनंदा पुष्कर का जाना, बलात्कार की शिकार निर्भया, एसिड अटैक से पीड़ित या बदबूदार गलियों में अपने शरीर की बोली लगातीं या फिर बदायूं जैसे इलाकों में पेड़ पर लटका दी गई युवतियां इस संग्रह की सांसें हैं। ...


ये कविताएं प्रार्थनाएं हैं, जो हर उस तीसरी औरत की तरफ से सीधे रब के पास भेजी गई हैं। जवाब आना अभी बाकी है। इसलिए यह भाव अपराध के सीलन और साजिशों भरे महल से गुजर कर निकले हैं। वे तमाम औरतें जो मारी गई हैं, जो माती जा रही हैं या जिनकी बारी अभी बाकी है- उनकी दिवंगत, भटकती आत्माएं स्वरों से परिचित होंगी।




पुस्तकायन : रानियां सब जानती हैं


अपमान-अपराध-प्रार्थना-चुप्पी... से उपजीं वर्तिका नंदा की ये कविताएं उन रानियों ने कही हैं, जिनके पास सारे सच, पर जुबां बंद। पलकें भीगीं। सांसें भारी। मन बेदम..


जनसता नई दिल्ली | August 30, 2015 11:41 am


अपमान-अपराध-प्रार्थना-चुप्पी... से उपजर्जी वर्तिका नंदा की ये कविताएं उन रानियों ने कही हैं, जिनके पास सारे सच, पर जुबां बंद। पलकें भीगीं। सांसें भारी। मन बेदम।


इन कविताओं को समाज में बिछे लाल कालीनों के नीचे से निकाल कर लिखा गया है- सुनंदा पुष्कर का जाना, बलात्कार की शिकार निर्भया, एसिड अटैक से पीड़ित या बदबूदार गलियों में अपने शरीर की बोली लगातीं या फिर बदायूं जैसे इलाकों में पेड़ पर लटका दी गई युवतियां इस संग्रह की सांसें हैं।...


ये कविताएं प्रार्थनाएं हैं, जो हर उस तीसरी औरत की तरफ से सीधे रब के पास भेजी गई हैं। जवाब आना अभी बाकी है। इसलिए यह भाव अपराध के सीलन और साजिशों भरे महल से गुजर कर निकले हैं। वे तमाम औरतें जो मारी गई हैं, जो मारी जा रही हैं या जिनकी बारी अभी बाकी है उनकी दिवंगत, भटकती आत्माएं इनके स्वरों से परिचित होंगी।



कविता से कराया सच का सामना


गरिमा शर्मा


हाल ही में एक पुस्तक के विमोचन के साथ एक अनोखे अभियान की भी शुरुआत हुई। वरिष्ठ कथाकार वर्तिका नन्दा की पुस्तक 'रानियां सब जानती हैं' के विमोचन के साथ 'रानियां भी बोलें, कानून पट्टी खोलें' नाम से एक अभियान भी शुरू हुआ। यह पुस्तक उन रानियों पर लिखी गई कविताओं का संग्रह हैं जिनमें रानियों के पास सब कुछ था लेकिन कहने की आजादी नहीं थी। इनमें बताया गया है कि चोट सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि सामाजिक और मानसिक भी होती है। इस अवसर पर एसिड हमलों की शिकार महिलाएं भी मौजूद थीं। उनमें से एक पीड़िता ने कविता का पाठ भी किया।


इस मौके पर वर्तिका नन्दा ने बताया, 'समाज में हर रानी के पास एक सच है, लेकिन इस सच की चावी किसी राजा के पास ही है। इस कविता संग्रह में कुछ


कविताएं जीबी रोड में वेश्यावृत्ति कर रही महिलाओं पर हैं, तो कुछ एसिड अटैक को झेल चुकी युवतियों पर। कविता उन पर लिखी गई है जो बदायूं जिले के एक गांव में पेड़ पर लटकी मिली थीं। वे सब किसी न किसी की रानियां थी, लेकिन उनके पास सच बोलने की आज नहीं थी।'






November 3, 2014


Vartika Nanda's presentation regarding domestic violence, organised not long back in New Delhi's CSOI, Chanakyapuri, marked the beginning of a national campaign to generate awareness about the issue.


The show was held to draw attention to her upcoming book "Raniyan Sab Jaanti Hai" which focuses on the issue of domestic violence inflicted on women in the upper crust of society. The evening saw dramatic performances of music, vocals, poetry and dance.


The presentation was based on poems from "Tinka Tinka Tihar", an anthology of poetry that includes writings by women inmates of Tihar jail, edited by Vartika Nanda and Vimla Mehra.


Kuchipudi dancer and choreographer Arunima Kumar focused on the idea of the silence of the domestic violence victim, with lines such as "Main maun rehna chahti hun" (I wish to remain silent). Her eyes perfectly illustrated the pain and anguish of the victim and they equally well described the power and rage of a woman. The poetry recitation's dramatic effect was further amplified by the addition of light folksy music and the striking of Arunima's feet with resounding ghungroos, that gave each verse a powerful expression. Vartika, who has been awarded the Stree Shakti Puraskar by the President of India, Pranab Mukherjee, for her exceptional work in promoting women's empowerment, said, "Women from upper classes of society may seem empowered but when they suffer from domestic violence, they too have nowhere to go. Through this book and performance I want to pose an important question for how long will we wait before breaking the silence on this issue?"


Arunima's dance performance echoed this message when she ended with her mouth covered with a piece of black cloth to signify the suppressed voices of victims of domestic violence.


Vartika added, "Raniyan or women from upper class families are just as helpless on the issue of domestic violence as women of lower strata are. Through this event I also want to bring out that our current anti-domestic violence act is very weak."

Book Review in Amar Ujala: Kavya: 1 April, 2024: https://www.amarujala.com/kavya/book-review/review-of-dr-vartika-nanda-book-raniyan-sab-janti-hain-2024-04-01

Citations and References: Raniyan Sab Janti Hain  

1. Raniyan Sab Janti Hain। Podcast। Poetry। Literature ।Year 2015 ।Vartika Nanda।: March 8th 2024 https://youtu.be/kMur76e5KPE?si=1DPDjdcejCOeJUmU

  1. Raniyan Sab Janti Hain: Rituraj Parampara Award: August 12th 2016 https://youtu.be/I474L81V7SU?si=OsyQkAlEl6oWOKpi 

  2. Book Release: Raniyan Sab Janti Hain: Vartika Nanda:World Book Fair: 2015: February 18th 2015 https://youtu.be/zl8V6qKulw0?si=ZQGkBveyJIk3Eumm 

  3. Raniyaan Sab Janti Hain। Year 2015। Vartika Nanda: August 4th 2015 https://youtu.be/mvHUnEk7gDE?si=xMIXrKCjePkXnvRa 

  4. 92.7: Release: Raniyan Sab Janti Hain: Vartika Nanda: Dilli Meri Jaan: March 28th 2015 https://youtu.be/vlCzVQ4f3Dc?si=R4WT7CrZp7td4VfM

  5. Journey: Raniyan Sab Janti Hain: March 19th, 2015: https://youtu.be/d7tSURwI45w?si=thCX5MkedW6P0Hvq 

  6. Websites: www.vartikananda.com/ www.tinkatinka.org

  7. Website Link: Raniyan Sab Janti Hain – Vartika Nanda

  8. Blog:  www.vartikananda.blogspot.com 

Google Link: VARTIKA NANDA - Google Search
 


May 21, 2012

संसद से सड़क तक– हम धन्यवाद नहीं कहते

रानियां सब जानती हैं
उनकी आंखों में सपने
तैरते ही नहीं
वे अधमुंदी भारी
पलकों से रियासतें देखती हैं
सत्ताओं के खेल
राजा की चौसर

वे इंतजार करती हैं
अपने चीर हरण का
या फिर आहुति देने का

वे जानती हैं
दीवार के उस पार से
होने वाला हमला
उन्हें ही लीलेगा
पहले

पर वे यह भी जानती
हैं
गुलाब जल से चमकती
काया
मालिशें
खुशबुएं
ये सब चक्रव्यूह हैं

वे जानती हैं
पत्थर की इन दीवारों
में कोई रोशनदान नहीं
और पायल में दम नहीं

मकबरे यहीं बनेगें
तारीखें यहीं बदलेगीं
पर उनकी किस्मत नहीं
रानियां बुदबुदाती
हैं

गर्म दिनों में सर्द
आहें भरतीं हैं
सुराही सी दिखकर
सूखी रहती हैं
अंदर, बहुत अंदर तक (( थी हूं रहूंगी से)


म्यूजिकल चेयर खेलने की घंटी बज चुकी है। दौड़ दिलचस्प होती दिख रही है। खास तौर पर इसलिए कि मामला देश की सबसे बड़ी और सबसे सुनहरी कुर्सी का है। पर इस खेल में मजे से ज्यादा किरकिराहट है और वही खेल के स्वाद को फीका भी कर रही है।

राष्ट्रपति के तौर पर अपनी अंतिम विदेश यात्रा से लौटते हुए विमान में देश की प्रथम महिला ने इस बात को साफ किया कि राष्ट्रपति की विदेश यात्रा को सरकार तय किया करती है, न कि राष्ट्रपति भवन। उन्होंने यह भी कहा कि वे पहली या अंतिम राष्ट्रपति नहीं हैं जिनके साथ उनका परिवार यात्रा पर गया हो। इससे दुखद और क्या होगा कि किसी देश की प्रथम महिला को ऐसे विवादों और सवालों का जवाब देना पड़े जो उनके कार्यकाल से पहले या उनके बाद भी उपज सकते थे। कार्यकाल का अंतिम समय, जो कि सुखद और भावुक क्षण होना चाहिए या फिर उपलब्धियों पर गरिमामय उल्लास का भी, वहां बेवजह के सवालों के जवाब देने की मजबूरी राष्ट्रपति के स्तर से ज्यादा सामाजिक जड़ की कमजोरी ही दिखती है।

देश का अगला राष्ट्रपति कौन हो- इसकी तमाम चिंताओं के बीच दरअसल इस समय एक नई राजनीति मौजूदा राष्ट्रपति की काबिलियत को लेकर शुरू हो गई है। दलित राष्ट्रपति, मुस्लिम राष्ट्रपति, सिख राष्ट्रपति, महिला राष्ट्रपति के बाद इस बार क्या हो, इस पर बहस का बाजार गर्म है। नए आगमन को लेकर चर्चाएं हैं पर जिनकी विदाई है, वे इससे कहीं ज्यादा चर्चा और विवाद का केंद्र बना दी गईं हैं।

तस्वीरें काफी तेजी से बदलती हैं। जुलाई 2007 में को मीडिया की सुर्खियां प्रतिभा सिंह पाटिल थीं - देश की पहली महिला राष्ट्रपति, सौम्य, सजग, संवेदनशील वगैरह। उनके लिए वे तमाम विश्लेषण इस्तेमाल किए गए जो किसी की गरिमा को चार चांद लगा सकें। यह बार-बार याद दिलाया गया कि वे आज तक कभी कोई चुनाव नहीं हारी हैं और बेहद प्रतिभावान है। उनके साथ उम्मीदों की एक भारी पोटली बांध दी गई। उनके जहन में भी महिला सशक्तिकरण और मजबूत भारत का सपना हमेशा रहा और उसे निभाने में यह पांच साल पंख लगाकर उड़ भी गए। अब लगा था कि यह समय उनके प्रति धन्यवाद ज्ञापन का होगा।

पर अब एक नई तस्वीर उभर रही है। यहां विवाद हैं। उन्हें क्यों चुना गया, क्या वे इस काबिल थीं, क्या वे वाकई राष्ट्रपति के तौर पर इस देश के लिए कुछ कर पाईं, उनकी यात्राओं पर 205 करोड़ रूपए का खर्च क्यों और कैसे हुआ, उनके परिवार ने उनके पद का कितना दुरूपयोग किया, उनके बेटे और पति ने कैसे अपने लिए कई सुविधाएं जुटा लीं, उन्हें पुणे की जमीन किस आधार पर मिली, उन्होंने महिलाओं के लिए कुछ किया या नहीं और क्या वे महज एक रबर स्टांप राष्ट्रपति थीं वगैरह। सवालों की झड़ी लंबी है। इन सवालों पर सोचने की जरूरत भी महसूस की जा सकती है पर साथ ही यह भी लगता है कि यह तमाम सवाल एक गलत समय पर उठे हैं और इसलिए इनका औचित्य भी कमजोर दिखाई देता है क्योंकि इन्हें शायद किसी विमर्श के लिए उठाया ही नहीं गया है। यह सब सवाल न तो चिंता की वजह से उठाए गए हैं और न ही किसी तरह के चिंतन के लिए। यह सवाल सिर्फ सवालों की भीड़ को खड़ा करने के लिए उठाए गए हैं। वैसे भी अगर वे एक रबर स्टांप राष्ट्रपति थीं तो फिर ज्ञानी जैल सिंह या फरूखीद्दिन अली अहमद क्या थे। तमाम राष्ट्रपति किसी न किसी स्तर पर रबर स्टांप रहे पर उन्हें लेकर इस तरह की तीखी टिप्पणियां नहीं हुईं।

दूसरे, बाकी बहुत से नेताओं या शीर्षस्थ पदाधिकारियों के मुकाबले प्रतिभा पाटिल ने यहां भी समझदारी ही दिखाई। वे उलझीं नहीं। पुणे की जमीन को लेकर विवाद हुआ तो उन्होंने उसे लौटा ही दिया लेकिन उनके इस कदम पर कोई प्रशंसात्मक खबर नहीं बनी। इसके अलावा उनके विद्या भारती शिक्षण प्रसारक मंडल पर कभी विस्तार से चर्चा नहीं की गई। यह मंडल अमरावती, जलगांव और मुंबई में स्कूल और कालेज चलाता है। उन्होंने श्रम साधना ट्रस्ट के तहत दिल्ली, मुंबई और पुणे में कामकाजी महिलाओं के लिए हास्टल भी बनाए पर वे भी कभी सकारात्मक खबर का केंद्र नहीं बने। इसी तरह जलगांव का इंजीनियरिंग कालेज और चीनी की फैक्टरी भी खबर से दूर रहे।

इस बार वजह साफ समझ में आती है। जिस वजह से प्रतिभा पाटिल को राष्ट्रपति के पद के लिए चुना गया, वही उनका विरोधी भी साबित हुआ है। उनका महिला होना, सौम्य होना और चुप्पी को साधे रखना। बेहद मुखर राजनीतिक माहौल और उद्देलित मीडिया के बीच यह काबिलियत नाकाबलियत ही ज्यादा है। अगर ऐसा न होता तो नरेगा और राष्ट्रीय महिला सशक्तिकरण को लेकर राष्ट्रपति जिस तरह लगातार सक्रिय और चिंतित रहीं, उन पर इस समय शायद कसीदे गढ़े जाते। पर चीजें बदलती हैं। कई बार विदाई को आभार की बजाए नकारात्मक तरीके से अंजाम दिया जाता है। इस बार भी यही हुआ है पर लगता है कि कम के एक देश की प्रथम महिला को तो कम से कम महिला होने का खामियाजा भुगतने से बचाया जाता और कम से कम यहां तो मीडिया महिला के प्रति भेदभावी रिपोर्टिंग से उबर पाता। यह गैर-जिम्मेदाराना, एक-पक्षीय और महिला के विपक्ष में की जाने वाली रिपोर्टिंग की एक ऐसी मिसाल है जिसे सालों याद किया जाएगा। वैसे भी वे रानियां ही क्या जिन्हें अंजाम भुगतने न पड़ें।